दर -दर भटकता राधा देवी न्याय की गुहार लेकर पहुंची पुलिस चौकी न्याय की उम्मीद लगाये बैठी
रामहरी गुप्ता/बलरामपुर:- दरअसल मामला छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिला के पुलिस चौकी वाड्रफनगर के ग्राम पंचायत रजखेता का है जहां पनिका समाज का एक परिवार 40वर्षो से काबिज भूमि पर मकान बनाकर अपना जीवन यापन पर रहे राधा देवी के नाम पर प्रधानमंत्री आवास योजना पंचायत रजखेता में स्वीकृत हुआ जिसके बाद रोजगार सहायक सचिव, सरपंच,के निर्देशन पर आवास निर्माण के लिए गढ्ढा की खुदाई हुई कालम तैयार हुआ सब ठीक ठाक चल रहा था पर यहां तो लोगो के नजर में कुछ और ही था बता दें ग्राम पंचायत रजखेता निवासी विजय मिश्रा के द्वारा जेसीबी मशीन से घर को तोडा गया और यह बताया गया कि दुर्गा पूजा का पंडाल बनाना है। जिसके बाद परिवार काफी परेशान होकर हितग्राही राधा देवी पुलिस चौकी वाड्रफनगर में जाकर एक लिखित शिकायत दी कि मेरा नाम पर प्रधानमंत्री आवास योजना का मकान बन रहे को विजय मिश्रा (नाना महाराज) सरपंच महेंद्र के द्वारा तोड़ दिया गया है।
इसके बाद शुरुआत होती है खेल शिकायत करने के बाद विजय मिश्रा, गिरिजा प्रसाद देवांगन (शिक्षक) महेंद्र(सरपंच)के द्वारा लगातार परिवार में दबाव बनाया जा रहा है कि तुम लोग शासकीय भूमि पर बसे हो तुम लोग को यहा नहीं रहने देंगे।
वही बताते चलें गिरिजा प्रसाद देवांगन (शिक्षक)ने हितग्राही राधा देवी के पुत्र विरेन्द्र कुमार को घर जाकर दुर्गा पंडाल पर बुलाया और बोला कि देखो तुम जाकर पुलिस चौकी पर जो शिकायत हुआ है उसको वापस ले लो नहीं तो आदिवासी एक्ट के तहत तुम लोगो में एफआईआर दर्ज कराकर जेल भेज देंगे वहीं मौजूद विजय मिश्रा ने कहा कि देखते हैं कैसे वापस अपनी शिकायत नही लेंगे यह धमकी दिया गया है।
वही ग्राम पंचायत रजखेता के सरपंच महेंद्र सिंह ने भी कहा कि तुम मुझे जातिसूचक गाली ग्लौज किये हो आदिवासी एक्ट मामले में शिकायत किया हु जब जेल चले जाओगे तब समझ आयेगा यह बात विरेन्द्र कुमार देवांगन को बोला गया जो हितग्राही के पुत्र हैं।
सरपंच का कहना है जितने भी जनरल लोग है सब मेरे सपोर्ट में है तुम जेल जाओगे.
वही विरेन्द्र कुमार देवांगन की माने तो उनका कहना है ना मैं किसी को जाति सूचक गाली ग्लौज किया हु ना ही कुछ बोला हूं बस इतना बोला हूं कि मां शिकायत की है तो मै पहले मां से बात करूंगा इसके अलावा कुछ भी नहीं बोला हु।
प्रधानमंत्री आवास योजना तोडना क्या सही है?
सबसे बड़ा सवाल पंचायत के रोजगार पंचायत सचिव, सरपंच पर जब हितग्राही के नाम पर पट़े् का भूमि नहीं तो प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत कैसे हुआ.
जब कार्य प्रारंभ किया तो पंचायत रोजगार सहायक सचिव जाकर किया ही होगा तो मना कैसे नहीं किया यह पंचायत के कर्मचारी व जनप्रतिनिधि पर सवाल होना लाजमी है।
सूत्रों के अनुसार वही जब मामला फसता देख जनप्रतिनिधि के द्वारा आदिवासी एक्ट की शिकायत पुलिस चौकी पर करना कहा तक न्यायोचित है।
परिवार को डराने और अपनी गलतियो को छिपाने के लिए बिचौलियों और जनप्रतिनिधि ने कोई कसर नहीं छोड रहे हैं।
मान लेते हैं आदिवासी एक्ट लगाकर परिवार को जेल भेज भी देते हैं तो इसमें कौन सा मेडल व पुरस्कार से बिचौलियों और जनप्रतिनिधि के लिए सम्मानित किया जाएगा।
